गुरुवार, 2 अप्रैल 2009

क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो

आपको आज एक शेर सुनाता हूँ शेर अर्ज़ है-

क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो
खूब गुज़रेगी जब मिल बैठेंगे दीवाने दो

दोस्तो, इस शेर के बारे में बातचीत अगले दौर में....

2 टिप्‍पणियां:

  1. हम तो अब भी मूर्खता की वेल्यू पर कायम हैं भाई.

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  2. तो फिर टिपण्णी भी अगले दौर तक मुल्तवी. आखिर मूर्खता भी इंतज़ार कर सकती है.

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