बड़ा शोर था कि एक अप्रैल २००९ से नकद राशि निकालने के लिए किसी भी बैंक का एटीएम अपना हो जाएगा. कहीं-कहीं शायद हो भी गया हो लेकिन मुझे तो मेरे पड़ोसी एटीएम ने ही अप्रैल फूल बना दिया.
दरअसल मेरा बचत खाता एचडीएफसी बैंक में है. इसका एटीएम घर से दूर पड़ता है. लेकिन इस बात का कभी मलाल नहीं होने पाया. बगल का आईसीआईसीआई बैंक एटीएम हमेशा संकटमोचक बनकर काम आता रहा. एचडीएफसी बैंक में वेतन खाता होने के चलते यह सुविधा भी थी कि आईसीआईसीआई बैंक एटीएम से नकद निकालना निःशुल्क था. लेकिन शायद आईसीआईसीआई बैंक एटीएम को सुबह-सुबह ही पता चल गया था कि आज पहली अप्रैल है.
घर से निकलते समय पड़ोसी के घर रफ़ी साहब का यह गाना भी बज रहा था- 'अप्रैल फ़ूल बनाया तो उनको गुस्सा आया.' लेकिन कमबख्त उधर ध्यान नहीं गया तो नहीं ही गया. जल्दी में था सो हांफते, दम साधते आईसीआईसीआई बैंक के एटीएम में दाखिल हुआ. इस कियोस्क में ३ मशीनें हैं. लेकिन मेरी किस्मत देखिए कि वे अन्य ग्राहकों के लिए पैसे उगल रही थीं लेकिन मेरे एचडीएफसी एटीएम कार्ड से सौतन का रिश्ता निभाने लगीं. बार-बार प्रयास करने के बावजूद उनमें से धेला भी नहीं निकला. अब मैं सर पकड़ कर बैठ गया. शुल्क लगने के ज़माने में जो एटीएम मुझे निःशुल्क पैसे दिया करता था, आज बेमुरव्वत बना बैठा था.
अभी मैं उधेड़बुन में था कि बगल में खड़े एक ग्राहक का मोबाइल बज उठा. उसका रिंगटोन भी यही था- 'अप्रैल फ़ूल बनाया तो उनको गुस्सा आया.' बात भेजे में आ गयी. इंसान ही नहीं, कभी-कभी मशीनें भी अप्रैल फूल बना दिया करती हैं!
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वो मशीन धन्य हुई जो आपको बना गई भाई जी!!
जवाब देंहटाएंशुक्र मनाईये कार्ड को गले नहीं लगाया ,कुछ गले लगाकर बैठ जाती है....
जवाब देंहटाएंsame happend with me in Delhi so im ur shareek-e-gham Bijoy baboo !
जवाब देंहटाएंहा हा पण्डितजी भले अप्रैल्फूल बने पर गाना तो ज़ोरदार याद दिला गए। जय हो।
जवाब देंहटाएंहा हा हा! आप सबका धन्यवाद!
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