रविवार, 9 दिसंबर 2007

फुटबाल कैसे बना सॉकर?


फुटबाल मेरा प्रिय खेल रहा है। यह दीगर बात है कि मैं इसका दर्शक ज्यादा रहा हूँ. लेकिन अन्तरराष्ट्रीय फुटबाल मैचों के दौरान स्टेडियमों में लगनेवाले नस्लवादी नारों से मेरा ह्रदय दुखी हो जाता है. मुझे याद है १९८१ में डेपफोर्ड अग्निकांड में १३ अश्वेत युवक जल कर मर गए थे जिसके शक की सुई श्वेतों की तरफ गयी थी और मिकवाल में नारे लगाए जाते थे- 'वी आल एग्री, निगरस बर्न बेटर दैन पेट्रोल'.

इसी तरह हीज़ल स्टेडियम में एक दीवार ढहने से अश्वेतों के प्रिय लीवरपूल क्लब के ३९ प्रशंसक मारे गए थे। मौके से ब्रिटिश नेशनल पार्टी के पर्चे बरामद हुए थे. यह जगजाहिर है कि इंगलैण्ड के दक्षिणपंथी संगठन अपने फासीवादी उद्देश्यों के लिए फुटबाल प्रशंसकों का हमेशा इस्तेमाल करते रहे हैं.

इंग्लैंड में फुटबाल मैचों के दौरान यह नारा लगते आपने सुना ही होगा- 'स्टैंड बाय द यूनियन जैक, सेंड दोज निगरस बैक, इफ यू आर व्हाइट, यू आर आलराइट, इफ यू आर ब्लैक, सेंड देम बैक'।

फुटबाल से जुड़ी इस नफ़रत की राजनीति के अलावा मेरी यह जानने में भी बड़ी दिलचस्पी पैदा हुई कि आख़िरकार फुटबाल शब्द 'सॉकर' में तब्दील कैसे हुआ। सरल जवाब तो यही सामने आता था कि यह अवश्य किसी यूरोपीय भाषा का शब्द होगा। मैंने तलाशी अभियान चलाया लेकिन कामयाबी हाथ न लगी। अपुष्ट जानकारी यह मिली कि यह किसी स्थानीय भाषा का शब्द है। लेकिन मैं हाथ पर हाथ धरे अभी बैठा ही था कि एक पत्रिका ने मेरे ज्ञान-चक्षु खोल दिए। सॉकर का भेद खुल गया था। आपके साथ बाँट रहा हूँ-

'सन् १८८० के दशक में ऑक्सफोर्ड विश्विद्यालय के छात्र बोलते समय, अक्सर जिन शब्दों को छोटा करना होता था, उनके आख़िर में 'ईआर' जोड़ दिया करते थे। युवाओं के लिए यह दिलचस्प खेल बन गया था और उस दौर का ख़ास स्लैंग भी. उदाहरण के लिए, रग्बी फुटबाल को 'रगर' कहा जाने लगा.

चार्लस रीफोर्ड ब्राउन नामक छात्र से एक बार पूछा गया कि क्या वह 'रगर' खेलना चाहेगा? उसने मज़ाक में जवाब दिया- 'नो सॉकर'। दरअसल ब्राउन ने सोसिएशन (फुटबाल) को छोटा करके उसमें 'ईआर' जोड़ दिया। फ़िर क्या था. यह शब्द सबकी जुबान पर चढ़ गया. ब्राउन आगे चलकर इंग्लैंड की फुटबाल यानी सॉकर टीम में भी शामिल हुआ था।'

मुझे यह सब जानना बेहद दिलचस्प लगा. आप क्या कहते हैं?

3 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया जानकारी दी है आपने विजयशंकर जी। धन्यवाद। खेल और नस्लभेद का ये रिश्ता मुझे मालूम नहीं था।

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  2. धन्यवाद, दिलीपजी! यह भी मैंने कहीं पढ़ा था और सबके साथ बांटना चाहा.

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  3. आपका फुटबाल प्रेम तो छुपा ही रहता....अगर आप न छापते यहाँ....छापिए हम पढ़ रहे हैं....

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