आपको आज एक शेर सुनाता हूँ शेर अर्ज़ है-
क़ैस जंगल में अकेला है मुझे जाने दो
खूब गुज़रेगी जब मिल बैठेंगे दीवाने दो
दोस्तो, इस शेर के बारे में बातचीत अगले दौर में....
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मेरी नई ग़ज़ल
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This is a humourous article. भाई साहब, और बहनजियो! ब्लॉग blog लिखना अपन के लिए बवाल-ए-जान बन गया है। बल्कि सच कहूं तो बवाल-ए-जेब बन गया है....
हम तो अब भी मूर्खता की वेल्यू पर कायम हैं भाई.
जवाब देंहटाएंतो फिर टिपण्णी भी अगले दौर तक मुल्तवी. आखिर मूर्खता भी इंतज़ार कर सकती है.
जवाब देंहटाएंHi, Really great effort. Everyone must read this article. Thanks for sharing.
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